Friday, January 03, 2020

वो कच्चा रिश्ता, पक्के रंग छोड़ गया...!!!

मत खोलना
जिंदगी की
पुरानी किताब को

जो था वो मैं रहा नहीं
जो हूँ वो
किसी को पता नहीं

Wo ishq jo humse seekha tha,
Wo ab tum kisse karte ho.

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 ना जाने कौन सी दौलत है आपके लफ़्जों में
 बात करते हो तो दिल खरीद लेते हो।

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 रह  चुके  है  जो  इश्क़  में  बेसब्र,
सब्र  करना  उन्हीं  को  आता  ये कश्मकश है ज़िंदगी की,
कि कैसे बसर करें!
ख्वाहिशे दफ़न करे,
या चादर बड़ी करें!
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Woh jhooth bolegi aur lajawab kar degi,
Main sach kahunga, phir bhi haar jaunga.

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या तो हमें मुकम्मल चालाकियां सिखाई जाए,

नहीं तो मासूमों की अलग बस्तियाँ बसाई जाए।

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तुम्हारा सिर्फ हवाओं पे शक़ गया होगा

चिराग़ खुद भी तो जल-जल के थक गया होगा.

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हसरते यू लिपट के रोती है..

जिंदगी इक मज़ार हो जैसे..!

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aaj phir neend ko aankho se bichadte dekha ...

aaj phir yaad koi chot puraani aayi ...

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अब जवाबों का इंतज़ार नहीं करता..
मैंने सवालों को बहलाना सीख लिया है..

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मीलों का सफर पल में बर्बाद कर गया.!
उसका ये कहना कहो कैसे आना हुआ.!!

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ग़म तो जनाब फ़ुरसत का शौक़ है,

ख़ुशी में वक्त ही कहाँ मिलता है।

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ग़ुज़री  तमाम  उम्र, उसी  शहर  में  जहाँ,

वाक़िफ़ सभी तो थे मगर पहचानता कोई न था

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क्या लिखूँ  अपनी जिंदगी के बारे में.
वो लोग ही बिछड़ गए. जो जिंदगी हुआ करते थे !!
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मेरे तबाह होने की मुराद रखता है कोई
चलो, इस ही बहाने हमें याद रखता है कोई...

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दोनों ने ही छोड़ दी फ़िक्र,
उसने मेरी, मैनें ख़ुद की...!

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दिखावे की मोहब्बत का बाज़ार चलता है यहाँ...
सच्चे एहसास रोज खुदखुशी करते है...!!

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नजर नमाज नजरिया सब कुछ बदल गया,
एक रोज इश्क़ हुआ और मेरा खुदा बदल गया।

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देख लो ... दिल पर कितने ज़ख़्म हैं....!
तुम तो कहते थे.... इश्क़ मरहम है..!!

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तुम शहर की रिवायत से अंजान हो दोस्त...!"

यहां याद रहने के लिए याद दिलाना पड़ता है...!!

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वो कच्चा रिश्ता,
पक्के रंग छोड़ गया...!!!

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बहुत भीड़ है, इस मुहब्बत के शहर में...
एक बार जो बिछड़ा ,वो दोबारा नहीं मिलता...

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तुझे क्या देखा, खुद को ही भूल गए हम इस क़दर

कि अपने ही घर आये तो औरों से पता पूछकर..

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मतलब निकल जाने पर पलट के देखा भी नही तुमने..!

रिश्ता तुम्हारी नज़र में कल का अखबार हो गया..!!

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 दहलीज़ पे खड़ा हूँ नए साल की,

अब पैबंद बदल दे मेरे हाल की...