Friday, January 03, 2014

agar woh tera hai to tere paas kyun nahi..?


Toota hua saaz hoon main

Khud se hi naaraz hoon main

Seene mein jo kahin pe dabi hai

Aisi koi aawaaz hoon main








Kamaal ka taana dete hai duniya wale bhi,
ki agar woh tera hai to tere paas kyun nahi..?

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Pehle Barish Hoti Thi To Yaad Aate They
Ab Jab Yaad Aate Ho To Barish Hoti Hai…

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Na Neend Hai Aankhon Me, Na Hi Koi Hasrat,
Kitna Saada Sa Reh Gaya Hun Mein Tere Baghair…

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Tu mera na hua to tera bhi kya kasoor hai is mein,
Jinhe dil or jaan se chaha jaye wo aksar kisi or ki
kismat mein hua karte hai….


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Kismat ki lakiro pe aitbar krna chod
diya......
Jab insan badl sakte hai to lakire
kyu nahi..

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बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ अपने आप में
लेकिन बस तुमको याद करने कि वो आदत अब भी बाकी है

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उसका वादा भी बडा अजीब था जिंदगी भर साथ निभाने का
मैंने भी ये नहीं पूछा कि मुहब्बत में साथ दोगे या यादों में ..

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सुबूत हैं मेरे घर में धुएं के ये धब्बे
कि कभी यहां उजालों ने खुदकुशी की है... 
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तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से,...
जान लोगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए... !!!

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Usi Ka Shehar, Wo Hi Khuda, Wo Hi Gawah,
Hume Yaqeen Tha Qusoor Humara Hi Niklega.

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प्यार में पाया क्या है यह मुझे मालूम नहीं है
पर तेरे सिवा ज़िंदगी में मैंने कुछ खोया नहीं।"

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कभी कभी चलते चलते पूछा पैर के छालो ने ,
बस्ती कितनी दूर बना ली दिल में बसने वालो ने ...!!

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Wajah poochne ka to mauqaa hi na mila....
Baas woh lehja badalte gaye aur hum ajnabi hote gaye...."

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उससे कह दो कि मेरी सजा कुछ कम कर दे...,
हम पेशे से मुजरिम नहीं हैं बस गलती से इश्क हुआ था...!!!

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लिखने ही लगा था की खुश हूँ तेरे बगैर 
आँसू तो आँसू थे कलम से पहले ही गिर गए

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जब लगा था "तीरतब इतना "दर्द हुआ 
 "ज़ख्मका एहसास तब हुआ जब "कमानअपनों के हाथ में देखी।।

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मौत शायद इसी को कहते है... 
दिल मेरा अब खवाहिशे नहीं करता...!!

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Hamare sath beete lamho ki yaadein sambhal ke rakhna,

Fir hum yaad toh aayenge par laut ke nahi aayenge.

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मेरी दोनों कोशिशें कभी कामयाब ना हो सकी .
पहला तुझे पाने की फिर तुझे भूल जाने की

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Yu Na Kar Barbad Muje Zara To Baaz Aa Mera Dil Dukhane Se

Ay Bewafa

Me To Fir Bhi Insaan Hu Patthar Tak Toot Jate Hai Itna Azmane Se....

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तू छोड़ रहा है तो ख़ता इसमें तेरी क्या
हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता

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कल रात मैंने अपने सारे ग़म.. कमरे की दीवार पर लिख डाले ।। बस फिर हम सोते रहे और दीवारे रोती रही ।।

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जब मैं डूबा तो समन्दर को भी हैरत हुई अजीब शख्स है किसी को पुकारता भी नहीं ।

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किनारे पर तैरने वाली लाश को देखकर ये समझ आया... बोझ शरीर का नही साँसों का था....

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आज अकेला सा महसूस कर रहा हूँ......
लगता है उनकी याद ने भी साथ छोड़ दिया!

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मुझको ढूंढ़ लेता है हर रोज नए बहाने से, ये दर्द वाकिफ हो गया है मेरे हर ठिकाने से.

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Kaash k wo bhi aa k hum se kah de......
Mai bhi tanha hu...
Tere bin...teri tarah...teri kasam...tere liye..!!

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रिवाज तो यही है दुनिया का मिल जाना बिछुड़ जाना ....

तुम से ये कैसा रिश्ता है , न मिलते हो न बिछुड़ते हो ...

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Sara Din Lag Jata Hai Hme Khud Ko Sametne Me!!!.... . 
Fir Raat Ko Unki Yaado Ki Hawa Chalti Hai Or . . . Hum Fir Bikhar Jaate Hai

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फ़िकर तो तेरी आज भी करते है..!

बस ज़िकर करने का हक न रहा..!!

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क्या अजीब सबूत माँगा है उसने मेरी मोहब्बत का,


मुझे भूल जाओ तो मानू की तुम्हे मुझसे मोहब्बत है..

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Mile Toh Hazaro Log The Zindagi Me,,,
Magar Wo Sabse Alag Tha Jo Kismat Me Nhi Tha..!!!

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बर्बाद करना था तो किसी और तरीके से करते !
जिंदगी बनकर...जिंदगी से...जिंदगी ही छीन ली तुमने ...!!

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मुझसे नाराज़ है तो छोड़ दे तनहा मुझको...

ज़िन्दगी देख मुझे रोज़ तमाशा न बना।।बना।।

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काश तुम भी हो जाओ
तुमहारी यादो की तरह,ना वक्त

देखो ना बहाना....बस चली अाओ

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किसी को घर से निकलते हे मिल गयी  मंज़िल! 

और कोई हमारी तरह उम्र भर मुसाफिर रहा!

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बड़ी पसंद थी उनको मुस्कान हमारी जब गए……
तो साथ ले गए

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Ek Ajeeb Si Kaifiyat Hai Meri Tere Bin....

Reh Bhi Leta Hoon Or Raha Bhi Nahi Jata....!!!

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कोई मुझ से पूछ बैठा 'बदलना' किस
को कहते हैं?
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सोच में पड़ गया हूँ
मिसाल किस की दूँ ?
"मौसम" की
या

"अपनों" की ??

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बुलंदियो को पाने की ख्वाहिश तो बहुत है मगर ,दूसरों को रौंदने का हुनर कहां से लाऊं..

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हर शख्स मुझे ज़िन्दगी जीने का तरीका बताता है..
उन्हें कैसे समझाऊ कि एक ख्वाब अधूरा है मेरा..

वरना जीना तो मुझे भी आता है

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Mile Toh Hazaro Log The Zindagi Me,,,

Magar Wo Sabse Alag Tha Jo Kismat Me Nhi Tha..!!!

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मुझसे नाराज़ है तो छोड़ दे तनहा मुझको...

ज़िन्दगी देख मुझे रोज़ तमाशा न बना।।

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